पिछले 3 वर्षों में भारत में किसी भी परमाणु ऊर्जा संयंत्र से रेडियोधर्मी रिसाव की कोई घटना नहीं: सरकार

पिछले 3 वर्षों में भारत में किसी भी परमाणु ऊर्जा संयंत्र से रेडियोधर्मी रिसाव की कोई घटना नहीं
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परमाणु ऊर्जा मंत्रालय ने कहा कि पिछले तीन वर्षों में देश के किसी भी परमाणु ऊर्जा संयंत्र से पर्यावरण में रेडियोधर्मी रिसाव की कोई घटना नहीं हुई है। लोकसभा में एक सवाल के जवाब में, अंतरिक्ष विभाग और परमाणु ऊर्जा विभाग में राज्य मंत्री जितेंद्र सिंह ने कहा कि परमाणु ऊर्जा नियामक बोर्ड द्वारा परमाणु ऊर्जा संयंत्रों की सुरक्षा की लगातार निगरानी और समीक्षा की जाती है।

उन्होंने एक लिखित उत्तर में कहा, “पिछले तीन वर्षों में देश में किसी भी परमाणु ऊर्जा संयंत्र से पर्यावरण में रेडियोधर्मी रिसाव की कोई घटना नहीं हुई है।” एक अन्य सवाल के जवाब में, सिंह ने कहा कि महाराष्ट्र के हिंगोली जिले के औंधा में एलआईजीओ-इंडिया परियोजना के लिए एल-आकार के कॉन्फ़िगरेशन में लगभग 174 हेक्टेयर भूमि (एल की प्रत्येक भुजा 4 किमी लंबाई के साथ) का अक्वायर्ड किया गया है।

सरकार ने लेजर इंटरफेरोमीटर ग्रेविटेशनल-वेव ऑब्जर्वेटरी (LIGO)-इंडिया प्रोजेक्ट की प्री इन्वेस्टमेंट एक्टिविटीज के लिए 79.85 करोड़ रुपये की प्रतिबद्धता जताई है।

उन्होंने बताया “परियोजना के लिए सिस्मीकली लौ नॉइज़ साइट की पहचान, एक्वीजीशन और विकास की आवश्यकता होती है, इसके बाद 4 किमी आर्म लेंथ इंटरफेरोमीटर डिटेक्टर के आवास के लिए आवश्यक नागरिक सुविधा का निर्माण होता है, जिसे सभी कंपन स्रोतों जैसे पंप, पंखे, एचवीएसी आदि को कंट्रोल्ड करने के लिए उपयुक्त रूप से डिज़ाइन किया गया है। ”

मंत्री ने कहा, काम के दायरे में डिटेक्टर की स्थापना के लिए उपयुक्त अल्ट्रा-हाई वैक्यूम प्राप्त करने के लिए नेसेसरी क्वालिटी कण्ट्रोल और कंटैमिनेशन कण्ट्रोल के साथ बड़े वैक्यूम कक्षों, लिक्विड नाइट्रोजन कर्यो-पम्पस आदि का निर्माण और स्थापना भी शामिल है।

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इस परियोजना का उद्देश्य वैज्ञानिकों और इंजीनियरों को ग्रेविटेशनल वेव्स के दायरे में गहराई तक जाने के अवसर प्रदान करना है।

कुछ साल पहले, वैज्ञानिकों ने पहली बार स्पेस टाइम के ताने-बाने में तरंगों का ऑब्जरवेशन किया था, जिन्हें ग्रेविटेशनल वेव्स कहा जाता है, जो दूर के ब्रह्मांड में एक काटाक्लिमिक इवेंट के जरिये पृथ्वी पर आती हैं।

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