भारत-इज़राइल का लक्ष्य रक्षा तकनीक, व्यापार के माध्यम से संबंधों को बढ़ावा देना

भारत, इज़राइल का लक्ष्य रक्षा तकनीक, व्यापार के माध्यम से संबंधों को बढ़ावा देना
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भारत और इज़राइल रक्षा और सूचना प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में सहयोग को गहरा करने के साथ-साथ मुक्त व्यापार समझौते पर लंबे समय से रुकी हुई बातचीत को फिर से शुरू करके संबंधों को मजबूत करने पर जोर दे रहे हैं। ऐसा तब हुआ है जब नई दिल्ली इजरायल की एडवांस्ड सैन्य तकनीक तक पहुंच बनाना चाहती है और परोक्ष रूप से वाशिंगटन के साथ अपने संबंधों को मजबूत करना चाहती है, जो कि इजरायल का करीबी सहयोगी है। बदले में, इज़राइल अपनी कंपनियों के लिए बड़े नए बाजारों को खोलने की उम्मीद करता है।

भारत के रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन और इजरायल के रक्षा अनुसंधान और विकास निदेशालय ने इस महीने की शुरुआत में सैन्य और व्यावसायिक उपयोग दोनों के लिए प्रौद्योगिकियों के विकास को बढ़ावा देने के लिए एक द्विपक्षीय समझौते पर हस्ताक्षर किए।

इस कदम के तहत, भारतीय और इजरायली स्टार्टअप छोटे मानव रहित विमान और आर्टिफीसियल इंटेलिजेंस जैसी तकनीक पर मिलकर काम करेंगे।

यह भारतीय विदेश मंत्री सुब्रह्मण्यम जयशंकर और इजरायल के विदेश मंत्री यायर लैपिड के बीच जून 2022 तक द्विपक्षीय एफटीए को पूरा करने के लक्ष्य के बीच एक अक्टूबर समझौते का अनुसरण करता है।

वार्ता मूल रूप से 2010 में शुरू हुई थी, लेकिन लंबे समय से निलंबित कर दी गई है। अब, पहली बार, दोनों सरकारों ने सौदे के समापन के लिए एक लक्ष्य तिथि निर्दिष्ट की है।

डेनमार्क में रोस्किल्डे विश्वविद्यालय में अंतरराष्ट्रीय विकास अध्ययन में एसोसिएट प्रोफेसर सोमदीप सेन ने कहा कि द्विपक्षीय एफटीए दोनों देशों को इजरायल के एडवांस्ड हथियारों तक भारत की पहुंच के शीर्ष पर आईटी आधारित टेक्नोलॉजिकल इन्नोवेशंस के विकास को बढ़ावा देने में सक्षम बनाएगा।

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सेन ने कहा, “इजरायल ने खुद को हाई क्वालिटी मिलिट्री हार्डवेयर के एक विश्वसनीय रिलाएबल सप्लायर के तौर पर अपने को साबित किया और बिना किसी राजनीतिक पूर्व शर्त के ऐसा करने को तैयार है।”

इजराइल के साथ भारत का व्यापार 2021 में अब तक कुल 3.5 बिलियन अमेरिकी डॉलर का हो चुका है, जिसमें इलेक्ट्रिकल इक्विपमेंट, जेवेलरी और एनर्जी राष्ट्रों के बीच व्यापार के केंद्र में हैं।

स्टॉकहोम इंटरनेशनल पीस रिसर्च इंस्टीट्यूट के अनुसार, रक्षा के मोर्चे पर, इज़राइल भारत का चौथा सबसे बड़ा हथियार सप्लायर है, जिसने 2011 और 2020 के बीच देश को 2.7 बिलियन अमेरिकी डॉलर के हथियारों का निर्यात किया है।

इज़राइल में, युवा अपने स्वयं के व्यवसाय शुरू कर रहे हैं, विशेष रूप से साइबर सुरक्षा और आर्टिफीसियल इंटेलिजेंस के क्षेत्र में, अपने अनुभव और सैन्य सेवा के दौरान पोषित व्यक्तिगत संबंधों का उपयोग करते हुए।

रक्षा उद्योग सैन्य और निजी क्षेत्रों के बीच सहयोग के माध्यम से विकसित हुआ है, हथियारों के साथ, जैसे कि आयरन डोम नामक एक वायु रक्षा प्रणाली, जो युद्ध में अत्यधिक प्रभावी साबित हुई है।

भारत पहले से ही इस्राइल से हथियारों का बड़ा आयातक है। लेकिन रक्षा उद्योग से परे, इज़राइल को उम्मीद है कि भारत स्वास्थ्य देखभाल और एग्रीकल्चरल टेक्नोलॉजी जैसे क्षेत्रों में अपनी कंपनियों के लिए एक बड़ा बाजार होगा।

भारत ने मुख्य रूप से जापान सहित एशियाई देशों के साथ एफटीए संपन्न किया है। हालांकि, मई से शुरू होकर, इसने यूके, यूरोपीय संघ और ऑस्ट्रेलिया के साथ वार्ता शुरू करने की घोषणा की।

अफगानिस्तान में संकट भारत को अपनी कूटनीति में विविधता लाने और मध्य पूर्व तक पहुंचने के लिए पूर्ण प्रयास शुरू करने के लिए प्रेरित करने में एक महत्वपूर्ण कारक रहा है।

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अगस्त में अफगानिस्तान के तालिबान के नियंत्रण में वापस आने के बाद से भारत के सीमावर्ती इलाकों में आतंकवाद को लेकर चिंताएं बढ़ रही हैं। और ऐसा प्रतीत होता है कि इस्लामिक आतंकवादी समूह पाकिस्तान और चीन के भारत के प्रति अक्सर शत्रुतापूर्ण रुख के साथ कदम मिलाता रहा है।

इजरायल को आतंकवाद विरोधी जबरदस्त उपायों के लिए जाना जाता है, जो इसे भारत के लिए संभावित रूप से आकर्षक भागीदार बनाता है।

इज़राइल भी अमेरिका के साथ घनिष्ठ संबंध रखता है और वाशिंगटन पर काफी प्रभाव डालता है। भारत इस प्रकार इजरायल के साथ अपने संबंधों को मजबूत करके अमेरिका के साथ अपने संबंधों को गहरा करने की उम्मीद करता है।

अक्टूबर में, जयशंकर ने संयुक्त अरब अमीरात के विदेश मामलों के मंत्री शेख अब्दुल्ला बिन जायद, अमेरिकी विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकन और लैपिड के साथ बैठक की।

भारतीय मीडिया ने जापान, अमेरिका, भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच चतुर्भुज सुरक्षा वार्ता के बाद बैठक को “नया क्वाड” स्थापित करने की दिशा में एक कदम बताया।

नई दिल्ली में एक स्वतंत्र थिंक टैंक ऑब्जर्वर रिसर्च फाउंडेशन के हर्ष पंत ने अमेरिका द्वारा गठित ढांचे के संदर्भ में कहा कि अमेरिका और भारत के बीच संबंधों का सुदृढ़ीकरण मध्य पूर्व में सहयोग का आधार भारत, इज़राइल और संयुक्त अरब अमीरात को स्थापित करने का रास्ता खोल रहा है।

उन्होंने कहा, “नया क्वाड” क्षेत्र में भारत के राजनयिक प्रोफाइल के बदलते ट्राजेक्टोरी को दर्शाता है।

इजरायल ने अमेरिका की मध्यस्थता के माध्यम से 2020 में यूएई के साथ अपने राजनयिक संबंधों को सामान्य किया, नए ढांचे में भारत की भागीदारी से यूएई और इजरायल के बीच नए संबंधों को बढ़ाने की उम्मीद है।

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एक इजरायली राजनयिक सूत्र ने कहा कि इजरायल और यूएई “अमेरिका और भारत के बीच (और भी गहराई से) लिंक कर सकते हैं”, एक ऐसा विकास जो सभी पक्षों के लिए “विन-विन” संबंध बनाता है।

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